जमुना प्रसाद ‘राही’

जमुना प्रसाद ‘राही’ की रचनाएँ

दयार-ए-संग में रह कर भी शीशा-गर था मैं दयार-ए-संग में रह कर भी शीशा-गर था मैं ज़माना चीख़ रहा था…

4 weeks ago