ज़फ़र ताबिश

ज़फ़र ताबिश की रचनाएँ

आँगन-आँगन जारी धूप आँगन-आँगन जारी धूप मेरे घर भी आरी धूप क्या जाने क्यूँ जलती है सदियों से बिचारी धूप…

4 months ago