ज़फ़र हमीदी

ज़फ़र हमीदी की रचनाएँ

अपने दिल-ए-मुज़्तर को बेताब ही रहने दो अपने दिल-ए-मुज़्तर को बेताब ही रहने दो चलते रहो मंज़िल को नायाब ही…

10 months ago