तोरनदेवी ‘लली’

तोरनदेवी ‘लली’की रचनाएँ

नवसंवत यही सोचती हूँ नवसंवत्! कैसी होंगी तेरी- वे नई लहर की घड़ियाँ। जब सबके हृदयों में होगा, सहज आत्म-अभिमान।…

3 weeks ago