फ़ारूक़ बाँसपारी

फ़ारूक़ बाँसपारी की रचनाएँ

ब-रोज़-ए-हश्र मिरे साथ दिल-लगी ही तो है ब-रोज़-ए-हश्र मिरे साथ दिल-लगी ही तो है कि जैसे बात कोई आप से…

2 days ago