बाघेली विष्णुप्रसाद कुवँरि

बाघेली विष्णुप्रसाद कुवँरि की रचनाएँ

पद / 1 क्यों बृथा दोष पिया को लगावत। तो हित चन्द्रमुखी चातक बनि परसन कूँ नित चाहत॥ हैं बहु…

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