रसनिधि

रसनिधि की रचनाएँ

दोहा / भाग 1 लखत सरस सिंधुर वदन, भालथली नखतेस। बिघन-हरन मंगल-करन, गौरी-तनय गनेस।।1।। नमो प्रेम-परमारथी, इहि जाचत हों तोहि।…

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