राकेश पाठक

राकेश पाठक की रचनाएँ

पिता रोज सुबह सुबह मेरी चीजें गुम हो जाती है कभी सिरहाने रखा चश्मा तो कभी तुम्हारी दी हुई घड़ी…

3 weeks ago