राजेन्द्र कुमार

राजेन्द्र कुमार की रचनाएँ

आईना-द्रोह (लम्बी कविता) राजनीति जब कर्म नहीं, कर्मकांड हो तो क्यों न उसके 'तांत्रिक' भी हों! भूमंडलीकृत कर्मकांड के ये…

3 weeks ago