राजेश शर्मा ‘बेक़दरा’

राजेश शर्मा ‘बेक़दरा’

बेचैनी न शब्द कागज़ पर, न दिल शरीर में, उड़ रहे हैं दोनों, बेठिकाना... न कागज पर कविता, न दिल…

3 weeks ago