राजेश शर्मा

राजेश शर्मा की रचनाएँ

अक्षत,हल्दी छूकर सपने अक्षत,हल्दी छूकर सपने, द्वारे-द्वारे जाएंगे शायद कुछ लौटे आमंत्रण,अब स्वीकारे जाएँगे जबसे कोई मौन ,दृगों पर, होकर…

3 weeks ago