विश्वप्रकाश ‘कुसुम’

विश्वप्रकाश ‘कुसुम’ की रचनाएँ

आलू-गोभी! दावत ने है मन ललचाया! क्या लोगे तुम आलू-गोभी? क्या खाओगे आलू-गोभी? गोभी का है स्वाद बढ़ाया! सबकी यही…

2 months ago