वृंदावनदास

वृंदावनदास’की रचनाएँ

प्रीतम तुम मो दृगन बसत हौ प्रीतम तुम मो दृगन बसत हौ। कहा भरोसे ह्वै पूछत हौ, कै चतुराई करि…

1 month ago