वृंदावनदास

वृंदावनदास’की रचनाएँ

प्रीतम तुम मो दृगन बसत हौ प्रीतम तुम मो दृगन बसत हौ। कहा भरोसे ह्वै पूछत हौ, कै चतुराई करि जु हंसत हौ॥ लीजै परखि… Read More »वृंदावनदास’की रचनाएँ