शहरयार

शहरयार की रचनाएँ

क़िस्सा मिरे जुनूँ का बहुत याद आएगा  क़िस्सा मिरे जुनूँ का बहुत याद आएगा जब-जब कोई चिराग हवा में जलाएगा…

2 months ago

शहरयार की रचनाएँ

ख़्वाब का दर बंद है  मेरे लिए रात ने आज फ़राहम किया एक नया मर्हला । नींदों ने ख़ाली किया…

2 months ago