अमरनाथ साहिर

अमरनाथ साहिर की रचनाएँ

कुछ फुटकर शे’र होने को तो है अब भी वही हुस्न, वही इश्क़। जो हर्फ़े-ग़लत होके मिटा नक़्शे-वफ़ा था॥ पिन्हाँ…

2 months ago