कुंवर प्रतापचंद्र ‘आज़ाद’

कुंवर प्रतापचंद्र ‘आज़ाद’ की रचनाएँ

बांध ले बिस्तर, फ़िरंगी बांध ले बिस्तर, फ़िरंगी, राज अब जाने को है, जुल्म काफ़ी कर चुके, पब्लिक बिगड़ जाने…

2 months ago