ख़्वाजा हैदर अली ‘आतिश’

ख़्वाजा हैदर अली ‘आतिश’ की रचनाएँ

दोस्त हो जब दुश्मने-जाँ  दोस्त हो जब दुश्मन-ए-जाँ तो क्या मालूम हो आदमी को किस तरह अपनी कज़ा मालूम हो…

2 months ago