जहूर बख्श

जहूर बख्श की रचनाएँ

बढ़ई बढ़ई हमारे यह कहलाते, जंगल से लकड़ी मँगवाते! फिर उस पर हथियार चलाते, चतुराई अपनी दिखलाते! लकड़ी आरे से…

4 weeks ago