फ़र्रुख़ ज़ोहरा गीलानी

फ़र्रुख़ ज़ोहरा गीलानी की रचनाएँ

बीते लम्हे कशीद करती हूँ बीते लम्हे कशीद करती हूँ इस तरह जश्न-ए-ईद करती हूँ जब भी जाती हूँ शहर-ए-शीशागराँ…

11 months ago