राजेश चड्ढ़ा

राजेश चड्ढ़ा की रचनाएँ

तुम्हीं तलाशो तुम्हें तलाश-ए-सहर होगी ‎ तुम्हीं तलाशो तुम्हें तलाश-ए-सहर होगी, हमको मालूम है सहर किसे मयस्सर होगी। पाग़ल हो…

3 weeks ago