क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’

क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’ की रचनाएँ

गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से अगर अपना गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से…

2 months ago