क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’

क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’ की रचनाएँ

गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से अगर अपना गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से…

12 months ago