छत्तीसगढ़ी

लाला जगदलपुरी की रचनाएँ

सज्जन कितना बदल गया है दहकन का अहसास कराता, चंदन कितना बदल गया है मेरा चेहरा मुझे डराता, दरपन कितना…

12 months ago

कुंजबिहारी चौबे की रचनाएँ

आँखी मा हमर धुर्रा झोंक दिये आँखी मा हमर धुर्रा झोंक दिये, मुड़ी मा थोप दिये मोहनी । अरे बैरी…

1 year ago