अजय ‘प्रसून’

अजय ‘प्रसून’ की रचनाएँ

पीली धूप  माचिस की है तीली धूप, सरसों-सी है पीली धूप। गरम दूध-सी उबल रही है, चूल्हे चढ़ी पतीली धूप।…

3 months ago