अज़ीज़ क़ैसी

अज़ीज़ क़ैसी की रचनाएँ

अल्फ़-लैला की आख़िरी सुब्ह फ़साना कैसे बढ़े न कोई साहिर-ए-पज़मुर्दा सिन न सौदागर न चीन से कोई आए न बाख़्तर…

3 months ago