अनिल अनलहातु

अनिल अनलहातु की रचनाएँ

मानवीय पीड़ा का ज़िगुरत हमारे बहुत पहले उठने केबहुत पहले उठ जाती है,ताकि खलल न पड़ेहमारे आराम देह सपने रहेंसुरक्षित।आधी…

3 months ago