ऋषिवंश की रचनाएँ

फ़सलें  दाने तो इच्छा के बोए थे ज़हरीली फ़सलें क्यों उग आईं पढ़े-लिखे लोगों ने सोचा था ख़ुशहाली इस रस्ते…

2 months ago

ऋषिपाल धीमान ऋषि की रचनाएँ

तुमने छुआ था मेरा जब हाथ चुपके-चुपके तुमने छुआ था मेरा जब हाथ चुपके-चुपके कितने मचल उठे थे जज्बात चुपके-चुपके।…

2 months ago

ऋषभ देव शर्मा की रचनाएँ

अश्लील है तुम्हारा पौरुष पहले वे लंबे चोगों पर सफ़ेद गोल टोपी पहनकर आए थे और मेरे चेहरे पर तेजाब…

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ऋतुराज की रचनाएँ

कभी इतनी धनवान मत बनना कभी इतनी धनवान मत बनना कि लूट ली जाओ सस्ते स्कर्ट की प्रकट भव्यता के…

2 months ago

ऋतु पल्लवी की रचनाएँ

शब्द नहीं कह पाते  कोई बिम्ब,कोई प्रतीक ,कोई उपमान नहीं समझ पाते ये भाव अनाम जैसे पूर्ण विराम के बाद…

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ऋतु त्यागी की रचनाएँ

मैं अपने हर जन्म में "मैं अपने हर जन्म में स्त्री ही होना चाहूँगी"। मैंने एक दिन अपनी प्रार्थना ईश्वर…

2 months ago

ऋचा दीपक कर्पे की रचनाएँ

उदासीनीकरण  नही हो सकता कोई शत प्रतिशत अच्छा या बुरा बिलकुल ही ... मौजूद होती है मनुष्य में अच्छाइयाँ और…

2 months ago