ओमप्रकाश सिंहल

ओमप्रकाश सिंहल की रचनाएँ

खिल-खिल जाएँ सारे पत्ते छीन लिये क्यों आज हवा ने पेड़ों के सब सुंदर कपड़े, कहाँ छिपाए उसने कपड़े सारे…

2 months ago