ओम पुरोहित ‘कागद’

ओम पुरोहित ‘कागद’ की रचनाएँ

सपनों की उधेड़बुन एक-एक कर उधड़ गए वे सारे सपने जिन्हें बुना था अपने ही ख़यालों में मान कर अपने !…

2 months ago