कुबेरदत्त

कुबेरदत्त की रचनाएँ

देह का सिंहनाद  यह मेरा अपमानित, तिरस्कृत शव... शव भी कहाँ- जली हडडियों की केस प्रापर्टी, मुर्दाघर में अधिक-अधिक मुर्दा…

2 months ago