‘खावर’ जीलानी

‘खावर’ जीलानी की रचनाएँ

अता के रोज़-ए-असर से भी टूट सकती थी अता के रोज़-ए-असर से भी टूट सकती थी वो शाख़ बार-ए-समर से…

2 months ago