गणेश बिहारी ‘तर्ज़’

गणेश बिहारी ‘तर्ज़’ की रचनाएँ

दुनिया बनी तो हम्द-ओ-सना बन गई ग़ज़ल दुनिया बनी तो हम्द-ओ-सना बन गई ग़ज़ल उतरा जो नूर, नूर-ए-ख़ुदा बन गई…

2 months ago