गिरिधर

गिरिधर की रचनाएँ

लाठी में गुण बहुत हैं  लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग। गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग।।…

1 year ago