घासीराम

कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे  कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे , मणि फणि वारे भोर फबन लौँ ऊटे हैँ ।…

3 months ago

घनानंद की रचनाएँ

वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै लड़कीली बानि आनि उर मैं अरति है। वहै…

3 months ago

घनश्याम चन्द्र गुप्त की रचनाएँ

तुम असीम रूप तुम्हारा, गंध तुम्हारी, मेरा तो बस स्पर्श मात्र है लक्ष्य तुम्हारा, प्राप्ति तुम्हारी, मेरा तो संघर्ष मात्र…

3 months ago

घनश्याम कुमार ‘देवांश’की रचनाएँ

इन पहाड़ों पर....-1 तवांग के ख़ूबसूरत पहाड़ों से उपजते हुए... सामने पहाड़ दिनभर बादलों के तकिए पर सर रखे ऊँघते…

3 months ago

घमंडीलाल अग्रवाल की रचनाएँ

कहो मम्मी, कहो पापा कहाँ घूमें, किधर जाएँ- कहो मम्मी, कहो पापा। सुधाकर मुसकराता है, इशारे से बुलाता है, लिए…

3 months ago