घनानंद

घनानंद की रचनाएँ

वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै वहै मुसक्यानि, वहै मृदु बतरानि, वहै लड़कीली बानि आनि उर मैं अरति है। वहै गति लैन औ बजावनि ललित… Read More »घनानंद की रचनाएँ