चंद्रदत्त ‘इंदु’

चंद्रदत्त ‘इंदु’ की रचनाएँ

बोल मेरी मछली हरा समंदर गोपी चंदर, बोल मेरी मछली कितना पानी? ठहर-ठहर तू चड्ढी लेता, ऊपर से करता शैतानी!…

2 months ago