जगत मोहन लाल ‘रवाँ’

जगत मोहन लाल ‘रवाँ’की रचनाएँ

गुल-ए-वीराना हूँ कोई नहीं है क़द्र-दाँ मेरा गुल-ए-वीराना हूँ कोई नहीं है क़द्र-दाँ मेरा तू ही देख ऐ मेरे ख़ल्लाक…

7 months ago