जमीलुर्रहमान

जमीलुर्रहमान की रचनाएँ

नजात दुखते हुए सीनों की ख़ुशबू के हाथों में उन जलते ख़्वाबों के लहराते कोड़े हैं जिन्हें वो इक गहनाए…

11 months ago