ज़क़ी तारिक़

ज़क़ी तारिक़ की रचनाएँ

बे-मकाँ मेरे ख़्वाब होने लगे  बे-मकाँ मेरे ख़्वाब होने लगे रत-जगे भी अज़ाब होने लगे हुस्न की महफ़िलों का वज़्न…

4 weeks ago