जाबिर हुसेन

जाबिर हुसेन की रचनाएँ

दीवार-ए-शब कारवाँ लुट गया क़ाफ़िले मुंतशिर हो गए तीरगी का धमाका हुआ और दीवार-ए-शब ढह गई सिर्फ़ सरगोशियाँ मेरी आँखों…

3 weeks ago