ठाकुर

ठाकुर की रचनाएँ

जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँट जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँटतब ही लौँ…

3 months ago