फ़ारिग बुख़ारी

फ़ारिग बुख़ारी की रचनाएँ

देख कर उस हसीन पैकर को देख कर उस हसीन पैकर को नश्शा सा आ गया समुंदर को डोलती डगमगाती…

6 months ago