बलराम ‘गुमाश्ता’

बलराम ‘गुमाश्ता’की रचनाएँ

एक झील का टुकड़ा बिना वजह यूँ ही लड़ बैठे लटका बैठे मुखड़ा, दुख में कविता लिखने बैठे- एक झील का टुकड़ा। झील का टुकड़ा… Read More »बलराम ‘गुमाश्ता’की रचनाएँ