बशीर फ़ारूक़ी

बशीर फ़ारूक़ी की रचनाएँ

अब के जुनूँ में लज़्ज़त-ए-आज़ार भी नहीं अब के जुनूँ में लज़्ज़त-ए-आज़ार भी नहीं ज़ख़्म-ए-जिगर में सुर्ख़ी-ए-रूख़सार भी नहीं हम…

2 weeks ago