‘बाकर’ मेंहदी

‘बाकर’ मेंहदी की रचनाएँ

अब ख़ानमाँ-ख़राब की मंज़िल यहाँ नहीं ‎ अब ख़ानमाँ-ख़राब की मंज़िल यहाँ नहीं कहने को आशियाँ है मगर आशियाँ नहीं…

2 weeks ago