बालमुकुंद गुप्त

बालमुकुंद गुप्त की रचनाएँ

रेलगाड़ी हिस-हिस हिस-हिस हिस-हिस करती, रेल धड़ाधड़ जाती है, जिन जंजीरों से जकड़ी है, उन्हें खूब खुड़काती है। दोनों ओर…

1 week ago