भगवतीचरण वर्मा

भगवतीचरण वर्मा की रचनाएँ

स्मृतिकण क्या जाग रही होगी तुम भी? निष्ठुर-सी आधी रात प्रिये! अपना यह व्यापक अंधकार, मेरे सूने-से मानस में, बरबस…

4 months ago