भगवत दुबे

भगवत दुबे की रचनाएँ

आप बड़े हैं आप निगलते सूर्य समूचा अपने मुँह मिट्ठू बनते हैं, हमने माना आप बड़े हैं! पुरखों की उर्वरा…

3 weeks ago