भैरूंलाल गर्ग

भैरूंलाल गर्ग की रचनाएँ

मूँछे वाह-वाह ये काली मूँछें, लगती बड़ी निराली मूँछें। किसी-किसी की इंच-इंच भर, कुछ ने गज भर पाली मूँछें। कुछ…

2 weeks ago