‘मज़हर’ मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ

‘मज़हर’ मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ की रचनाएँ

चली अब गुल के हाथों से लुटा कर कारवाँ अपना ‎ चली अब गुल के हाथों से लुटा कर कारवाँ…

6 days ago