मरदान अली खान ‘राना’

मरदान अली खान ‘राना’ की रचनाएँ

गयी जो तिफ़्ली तो फिर आलम-ए-शबाब आया गयी जो तिफ़्ली[1] तो फिर आलम-ए-शबाब[2] आया गया शबाब तो अब मौसम-ए-ख़िज़ाब आया मैं शौक़-ए-वस्ल[3] में…

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